Monday, 25 November 2013

Desh Ka Pehla Aantakwaadi ?

भारत को एक लंबे संघर्ष और असीमित बलिदान के बाद 15 अगस्त-1947 को आज़ादी मिली. अभी आजादी का जशन पूरी तरह मनाया भी नही गया था के हमारा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मार कर कर दि.इस तरह स्वतंत्र भारत का ए पहला आतंकवादी घटना था और नाथूराम गोडसे स्वतंत्र भारत का प्रथम आतंकवादी था.बहुत आश्चर्य होता है जब आज नाथु राम गोडसे को कुछ संप्रदायिक पार्टीयो द्वारा गोडसे को एक राष्‍ट्रीए हीरो बनाने की कोशिश चल रही है. इस आतंकवादी को पैदा करने वाला संगठन आर .एस . एस था. इस संगठन की बुनियाद 1925 मे विजयदशमी के दिन केशव हेडगोवार ने रखी जिस का मक़सद हिन्दुत्व के कॉन्सेप्ट को आयेज बडाना था. इस संगठन ने आजादी की लड़ाई मे कभी भी हिस्सा नही लिया बल्के बहुत से दस्तावेज़ से साबित होता है के संघ अंग्रेज़ो की चतुराई मे लगा रता था. संघ ने हमेशा भगवा झंडे को तरजीह दी कभी भी ए लोग राष्टिये झंडे को सल्यूट नही किया.

सत्य- अहिंसा के सबसे बड़े प्रवर्तक महात्मा गाँधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को कर दी गई थी, लेकिन उनकी हत्या की साजिश रचने वालों ने इससे कुछ दिन पहले भी 20 जनवरी को एक प्रार्थना सभा में बापू को मारने का प्रयास किया था हालाँकि वे इसमें असफल रहे।बहरहाल, अगर 20 जनवरी के हादसे को गंभीरता से लिया गया होता तो शयेद बापू बच गये होते.गाँधी जी के हत्या का कारण पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये देने के लिये सरकार को बाध्य करना और उन का मुस्लिमो के प्रति प्रेम बताया जाता है.लेकिन गन्ही जी के पौत्र तुषार गाँधी  बापू की हत्या का यी करण नही मानते, उन्हो ने अपनी पुस्तक ' लेट्स किल गाँधी" मे लिखा है के गाँधी जी की हत्या पूर्वनियोजित थी और ब्राह्मण का एक समुदाय जो हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहता था, उसी ने हत्या करवाया क्यो के वे गाँधी जी को अपने राह मे रोड़ा समझती थी.

Why Godse killed Gandhi पुस्तक मे व. टी. राजशेखर लिखते है के गाँधी जी की हत्या के बारे मे संघ को पहले से ही मालूम था, जैसे ही हत्या की खबर मिली मिन्टो मे ही पूरे भारत मे मिठाये संघ के द्वारा बांटी गयी. जिस से लोग नाराज़ हो कर महाराष्ट्र और कर्नाटक मे लोगो ने बहुत से ब्राह्मणो के घर मे आग लगा दी.गाँधी जी हत्या का समय गोवालकर मद्रास मे ब्राह्मणो के एक सभा मे उपस्थित थे, उस के बाद वे नागपुर वापस आ गये, मगर 1 फरवरी 1948 को रात्रि मे उन्हे गाँधी जी की हत्या मे शामिल होने पे गिरफ्तार कर लिया गया. 4 फरवरी को संघ पर पूरे देश मे प्रतिबंध लगा दिया गया. गृह मंत्री सरदार पटेल 18 जुलाइ-1948 के एक पत्र मे श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखा के हमारे रिपोर्ट के अनुसार संघ और हिन्दू महासभा खासतौर से संघ ने देश मे घ्रणा का ऐसा माहौल बनाया जिस के करण गाँधी जी की हत्या हो गयी. 11 सितंबेर 1948 को एक और पत्र मे पटेल ने लिखा के जिस तरह गाँधी जी के हत्या के बाद संघ वालो ने खुशी जाहिर की और मिठायी बांटी जिस के करण लोगो मे नाराजगी बड गयी, इसी कारण संघ पर प्रतिबंध लगाना पड़ा.

अब हम आप को गाँधी जी की हत्या के पीछे का एक और सच बताने जा रहा हु जो के संघ की साम्प्रदायिकता जेहनीयात मे पैदा हुआ था, क्यो के गाँधी जी की हत्या पूर्वनियोजित थी इस लिये नाथूराम गोडसे का बंगलोर के एक हॉस्पिटल मे खतना -(Circumcision   कराया गया ताके मारने वाला मुसलमान प्रतीत हो सके, जिस के कारण जब ए खबर फैले गी तो मुसलमानो का क़त्लेआम शुरु हो जाये गा , मगर किस्मत का खेल देखिये के जैसे ही गाँधी जी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी वहा पे एक मौजूद आदमी ने कहा के ए नाथु तुम ने ए क्या कर दिया?. हत्या के कुछ देर बाद प्रधानमंत्री जवाहर लल नेहरू ऑल इंडिया रेडियो पे आये और उन्हो ने एलान किया के ' बहुत अफसोस के साथ कहना पड रहा है के आज एक पागल हिन्दू ने गाँधी जी की हत्या कर दी.

अब आप स्वंय देखे के आजादी के पहले और बाद मे संघ ने सिर्फ देश के खिलाफ ही काम किया है, और उन के बहुत से सदस्यो ने भी राष्ट्र के लिये काम नही किया है. इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही काहे गे के संघ के सदस्य अटल बिहारी बाजपायी जो के अंग्रेज़ो से लिखित माफी भी मांग चुके है और वो पत्र आउटलुक मे भी प्रकाशित हो चुका है भारत के प्रधानमंत्री बी बन चुके है. इस लिये हम कह सकते है के नाथु रम गोडसे स्वतंत्र भारत का पहला आतंकवादी था और संघ आतंकवाद पैदा करने वाला प्रथम संगठन था.

Dango Par Chuppi Kyo ?

सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च-2008 मे गुजरात दंगा के सामूहिक हत्या के जांच के लिये कमिट गठित करने के लिये जो ऑर्डर दिया था उसमें उसने कहा था के " साम्प्रदायिक एकता और सदभावना प्रजातंत्र का नीव है। दंगाइयो का कोई धर्म नही होता मगर ये आतंकवादियो से भी ज्यादा खतरनाक है"।कोर्ट का अवलोकन बहुत थोड़ा है मगर सार्थक और सच्चाई से बहुत क़रीब है। इस कसौटी पर पटना के धमाके और मुजफ़्फ़र नगर के फसाद को रखा जाये तो मीडिया और हुकूमत का रवैया बिल्कुल ही अलग नजर आता है।

कही एक धमका हो जाये सब के कान खड़े हो जाते है, केन्द्र और राज्‍यकीय प्रशासन फौरन हरकत मे आ जाती है भले ही इस धमाके मे कुछ लोग ही ज़ख्मी क्यो न हुए हो, लेकिन आतंकवाद के नाम पर उस की खबरे ऐसे बनाई जाती है के आतंक और भय का माहौल बन जाता है। पूरी जांच एजेन्सी इस धमाके के पीछे पड जाती है और चन्द ही दिनो मे इस केस को हल कर लिया जाता है और गिरफ्तारी भी की जाती है ये अलग बात है के बम धमाके मे हुए गिरफ्तार अपराधियो मे 90 % से अधिक बेगुनह्गार होते है जो बाद मे अदालत से छूट जाते है। न्यूज़ चॅनेल तो बम धमाके के 10 मिनट बाद ही धमाके के अपराधियो का पूरा शजरा बता देता है। लेकिन अगर कही सम्प्रदायिक दंगा हो जाये चाहे उस मे कुछ लोग मारे हो या हज़ारो की सांख्या मे मारे हो, लाखो लोग बेघर हो जाये या करोड़ो का आर्थिक नुकसान हो। यही हुकूमत जो एक धमाके पे दौडती है मगर दंगे पे उस के कानो पे जु तक नही रेंगती। हुकूमत उस वक़्त तक उस पर धयन नही देती जब तक सैकडो लोग की हत्या न हो जाये। पूरे देश और मीडिया का सम्प्रदायिक दंगे के प्रति उन का रवैया ऐसा रहता है जैसे ए कोई बड़ी घटना नही है बल्के हर रोज का मामूल है। इस लिये इस के बारे मे न तो कोई सोचता है और न कोई सनसनी फैलती है, जब के सच्चाई है के धमाके से ज्यादा दंगे मे लोग मारते है।और इस के कारण प्रजातंत्र की नीव हिलती नजर आती है जिस की तरफ सुप्रेम कोर्ट ने इशारा किया था।

अगर बम धमाके आतंकवाद है तो दंगे को क्या कहा जाये ग।कभि कभी तो ऐसा लगता है के दंगा को एक आम हत्या से भी कम समझा जाता है क्यो के एक हत्या मे फिर भी कानूनी प्रकिर्‌या नजर आती है लेकिन सम्प्रदायिक दंगे मे वो भी नजर नही आती है। बम धमाके के विरुद्ध नयी नयी जांच एजेंसिया बनाने और नये नये क़ानून बनाने पे विचार किया जाता है मगर सम्प्रदायिक दंगे पे नही। जब के सम्प्रदायिक दंगे भारत के लिये नासूर बन गया है मगर आज तक उस के खिलाफ कोई क़ानून नही बनाया जा सका , बल्के लगता है के भारत मे अब इस को अपराध समझा ही नही जाता इसी लिये कोई भी हुकूमत इस समस्या के हल के लिये आगे नही आ रहा है।

आप को एक हक़ीक़त और बता दु के  अगर आतंक और डर की बात की जाये तो बम धमाके से ज्यादा आतंक सम्प्रदायिक दंगे से फैलता है। पटना बम धमाके के बाद वहा की दिनचर्या एक दिन के अंदर मामूल पे आ गयी लेकिन क्या मुज़फ़्फरनगर दंगे  के बाद वहा की जिंदगी मामूल पे आ गयी, बिल्कुल नही। हम सभी जानते है के अभी भी लोग वहा 50 हज़ार से अधिक  रेलीफ कॅंप मे रह रहे है उन को अपने गाओ और घरो मे नही आने दिया जेया रहा है। अब आप खुद ही देखे के सम्प्रदायिक दंगे बम धमाके से अधिक खतरनाक है और भारत को बम धमाके से नही सम्प्रदायिक दंगा से खतरा है, इस लिये हुकूमत को इसे रोकने के लिये कड़े कदम उठने होंगे।

Muharram ??

नया इस्लामी वर्ष मुहर्रम से शुरु होता है. महीने मुहर्रम नवासह पैगम्बर इमाम हुसैन उनके साथी और परिवार वालो के खून से लिखा गया है.  चूंकि इस्लामी इतिहास के इस घटना  ने इस्लाम में गुटबाजी की पोल को खोल के रख दिया . आज भी इस घटना के बारे में आपस मे  भेदभाव का शिकार है . एक समूह इस घटना की याद मनाते है और दूसरा समूह इस घटना की याद मनाने से रोकता है . इस बात की परवाह किए बिना इस घटना की याद मनाना चाहिए या नहीं . आवश्यकता इस बात की है कि इस घटना स्मृति में जो संस्कार या रिवाज़ शुरू हो चुका है उनका आकलन किया और सोचा जाए कि उनके संस्कार या रिवाज़ कैसे मानवता के लिए लाभकारी बनाया जा सकता है .

  •  एक अनुमान के अनुसार शुरु मुहर्रम के 10 दिने मे इतने रिवाजो और संस्कारो होते है जैसे   रौज़ा ,  पालना ,  मेंहदी , जुलजानह ,  ताबूत आदि शोक परेड में निर्यात किए जाते हैं . हर साल हजारों नई  ताजिया तैयार की जाती हैं . छवि रौज़ा , छवि पालना , छवि ताबूत , छवि मेंहदी की कीमत कम से कम दो लाख रुपये से शुरू होती है . यानी हर साल मुहर्रम के शुरुआती दस दिनों के दौरान केवल नई  ताजिये, मेहंदी रस्म, जुल्जिनाह आदि की खरीद पर करोड़ों रुपये केवल किए जाते हैं . इसी तरह प्राथमिक दस दिनों में करोड़ों रुपये नियाज़ों पर खर्च किए जाते हैं . ज़ाकरीन और उलमा को मजालस करोड़ों रुपये चुकाए जाते हैं . प्रमुख उलमा और ज़ाकरीन एक सभा के पचास हजार रुपये से दो लाख रुपये तक वसूलते हैं . ठीक प्रारंभिक दस दिनों में अरबों रुपये खर्च किए जाते हैं . अगर यह सब प्रक्रिया पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलेगा कि मानवता और समाज को यह सब अभ्यास से कोई विशेष लाभ नहीं हो रहा है . थोड़ी से सुधार से भावना को मानवता के लिए बहुत सोदमनद बनाया जा सकता है . इन खर्चों की आधी राशि या कुछ हिस्सा भी आधुनिक शिक्षा , अस्पतालों , स्कूल, गरीबो की सहायता  मामलों पर खर्च किया तो कई समस्याओं को कम करने में मदद मिलेगी . कई बच्चों की शादियां संभव हो सकता है , कई बेरोज़गारों को रोज़गार प्रदान किया जा सकता है . जीवन स्तर में सुधार किया जा सकता है . इस भावना का रुख अगर वास्तव में मानवता की ओर मोड़ दिया जाए तो क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है . में कभी नहीं कहता कि रिवाजों को खत्म कर दिया जाए , मेरा मुद्दा यह है कि इन प्रथाओं पर उठने वाले खर्च उचित  हिस्सा मानवता के भलाई के लिये खर्च किया जाना चाहिये.

  •   एक  अनुमान के अनुसार केवल दस मोहर्रम को  करोड़ो से अधिक लोग भारत  में ज़नजीरिज़नी करते हैं  इमाम हुसैन की याद में अपना खून बहाती हैं .  लेकिन वास्तव में ज़नजीरिज़नी की रस्म से मानवता को कोई फायदा नहीं पहुंच रहा है . अगर लोग चाहे तो अपने खून का बेहतर इस्तमाल कर सकते है इस तरह फालतू खून बहाने का क्या लाभ, अगर अपना खून किसी बलडबनक को इमाम हुसैन के बलिदान की याद में दान कर दे . ताकि यह रक्त किसी जरूरतमंद रोगी जान बचाने के काम आ सके . तब वास्तव में खून मानवता के लिए उपयोगी साबित होगा .इस तरह सिर्फ दस मुहर्रम को भारत मे करोड़ो खून की बोतल जमा हो सकती है तो अंदाजा कीजिये पूरे दूनिये मे खून के कितना भंडार जमा हो जाये गा.

  •  यदि व्यासपीठ हुसैनी से नुहा मर्सिया के बजाय ज्ञान और तर्कसंगत चर्चा की जाए , सामाजिक एवं सामाजिक मुद्दों को उजागर किया , समाधान प्रस्ताव किए जाएं , धार्मिक सोच से ऊपर हो कि केवल अच्छे मानव समाज के गठन पर ध्यान दिया जाए तो गैर इंसानी व्यवहार , पूर्वाग्रह , नफरत , भेदभाव के भावनाओं के सामने मानवता , प्रेम , एकता भावनाओं को बढ़ावा दिया जा सकता है

kashmir samasya ka hal ?

अविभाजित भारत 1946 ई.मे अंग्रेजों द्वारा पेशकश कैबिनेट मिशन प्लान के तहत कांग्रेस और मुस्लिम लीग की गठबंधन सरकार बनाए जाने पर दोनों पक्षों में सहमति हो गई. कांग्रेस की मंजूरी के बावजूद पंडित नेहरू ने इस योजना को खारिज कर भारतीय विभाजन का रास्ता खोला. नेहरू ने ऐसा क्यों किया? इसकी सबसे बड़ी वजह नेहरू सत्ता मे भागीदारी नही चाहते थे और जो दूसरी वजह सामने आती है वह यह है कि नेहरू कृषि सुधार के माध्यम से हिंदुस्तान से जागीरदार प्रणाली का अंत चाहता था. लेकिन जमींदारों पे शामिल मुस्लिम लीग को यह मंजूर नहीं था. इन्हीं मतभेदों में यह मतभेद था कि नेहरू की इच्छा थी कि Princely States की जनता यह फैसला करेगी कि क्या यह एक स्वतंत्र राज्य के रूप पर रहना है या हिंदुस्तान में विलय करना है. जबकि औपनिवेशिक ब्रिटेन अधिकार राज्य के नवाब या राजा को देना चाहता था जो मुस्लिम लीग की पुरजोर समर्थन प्राप्त था. बहरहाल इण्डिपेंडेंस ऑफ इंडिया 1947 के अधिनियम में इस बात पर सहमति हुई कि नवाबी राज्य यारजवाड़े का शासक ही स्वतंत्र रहने या भारत और पाकिस्तान में से किसी एक राज्य के साथ विलय का फैसला करेगा.जिन्ना इस के जबरदस्त समर्थक थे. इसी अधिनियम के तहत कश्मीर के राजा ने कश्मीर को एक स्वतंत्र राज्य रखने का फैसला किया. इसी तरह हैदराबाद की धनी राज्य भी स्वतंत्र रहने का फैसला किया.

लेकिन  पाकिस्तान बने कुछ महीने ही हुए थे कि पाकिस्तान की ओर से जनजातीय लश्कर ने कश्मीर कमजोर राज्य पर हमला कर दिया जिसे जिहाद कश्मीर का नाम दिया गया. जनरल अकबर ने अपनी पुस्तक "Raiders of Kashmir" में बात खुल के स्वीकार किया है कि वास्तव में इस आदिवासी लश्कर को सेना के नेतृत्व और ररहनमाई प्राप्त था. आप उन्हें समय तालिबान समझ सकते हैं. उसी समय से पाकिस्तानी स्थापना और कबाइली मुजाहिदीन का गठबंधन शुरू हुआ जो आज तक जारी है. अक्सर पाकिस्तानी विचारक और इतिहास दान अमेरिका 1979-1988 ई. के अफगान जिहाद के दौरान मुजाहिदीन और तालिबान के निर्माता बताते हैं. लेकिन सच तो यह है कि पाकिस्तान के प्रोरदा आदिवासी मुजाहिदीन का इतिहास बहुत पुराना है. यह तभी शुरू होती है जब पाकिस्तान का अस्तित्व प्रक्रिया में आया और जब कि उस समय पाकिस्तान अमेरिका के साथ किसी प्रकार के अंतरराष्ट्रीय गठबंधन जैसे Seato या Cento साझा तक न था. जब राज्य कश्मीर के शासक हरि सिंह ने यह देखा कि उसकी कमजोर राज्य एक बड़े देश की Proxy सेना से तुलना के सकत नहीं रखती तो वह भारत से मदद मांगी ली. भारत ने इस मौके का फायदा उठाया और रनारो भारतीय सेना की मदद कश्मीर के भारत के साथ विलय के अधीन किया. नाचार हरी सिंह को भारत की यह शर्त माननी पड़ी.यूं इण्डिपेंडेंस ऑफ इंडिया 1947 के एकट की अंतर्गत भारत राज्य कश्मीर को अपने देश में जोड़ने का कानूनी अधिकार मिल गया. भारतीय सेना ने आदिवासी लश्कर पीछे धकेल शुरू किया लेकिन संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी सेज़ फायर के तहत उसे बंद होना पड़ा और कश्मीरी राज्य के एक बड़े हिस्से को वह वापस लेने में कामयाब न हो सका. यही हिस्सा अब पाकिस्तान में 'स्वतंत्र कश्मीर' कहलाता है जबकि भारत में यह पाक अधिकृत कश्मीर के नाम से जाना जाता है.

 दरअसल पाकिस्तान ने इण्डिपेंडेंस ऑफ इंडिया 1947 के एकटकी पालन में दुर्भावनापूर्ण से काम लिया. दोनों दुनिया का मज़ा लौटना चाहता था. एक तरफ तो उसका ख्याल था कि हैदराबाद डेक्कन के शासक  ब्रिटेन से अपने मजबूत संबंधों के आधार पर राज्य को मुक्त रखने में सफल हो जाएगा. इसलिए जिन्ना ब्रिटेन की पेशकश प्रस्ताव का समर्थन किया जिसके तहत नवाबी राज्य के शासक को राज्य के भाग्य का फैसला करना था. हैदराबाद डेक्कन अपनी बेपनाह दौलत से नवजात पाकिस्तान के प्रायोजन कर रहा था. इसलिए पाकिस्तान हैदराबाद मुक्त राज्य के तरीके देखना चाहता था. दूसरी ओर पाकिस्तान का मानना था कि वह पड़ोसी राज्य कश्मीर बज़ोर शमशेर कब्जा हो जाएगा. लेकिन हुआ इसके बिल्कुल विपरीत. एक ओर तो पाकिस्तान ने कश्मीर में सेना क्षय कर खुद इसे भारत में शामिल होने पर मजबूर किया. दूसरी ओर भारत ने अपने ताकत के बल पर इसी तरह हैदराबाद-डेक्कन कब्जा कर लिया जैसे पाकिस्तान कलात राज्य पर कब्जा. इसे कहते हैं न खुद ही मिला न वेसाल सनम.अगर हम ध्यान दे तो सॉफ पता चलता है के भारत और पाकिस्तान दोनो के नजरे आज़ाद राज्यो पे थी और अपने मुल्क मे विलय करने का कोई न कोई बहना खोज ही रहे थे.

  भारत की ब्लैकमेलिंग के तहत कश्मीर के विलय पर कश्मीरी जनता में आक्रोश पाया गया. उन्हें इस बात पर गुस्सा था कि कश्मीर पाकिस्तान और भारत के बीच एक लूट माल बन गया था. इसलिए कश्मीर में राज्य की स्वतंत्रता के लिए एक राष्ट्रीयता वाले, लोकतांत्रिक और राजनैतिक संघर्ष शुरू हुआ जिसमें कश्मीरी मुसलमान तथा  हिन्दू कंधे से  कंधे  मिला कर शामिल थे. जबकि पाकिस्तान ने कश्मीर पर कब्जे के सपने को कभी भी भुला नही पाया इसलिये  वहाँ पाई जाने वाली राजनीतिक अशांति से लाभ उठाने के लिए पाकिस्तान ने एक बार फिर 1965 में कश्मीर पर हमला किया. इस बार पाकिस्तान ने सोचा कि क्योंकि नियंत्रण रेखा एक विवादास्पद सीमा है इसलिए यहां हमले के परिणाम में युद्ध यहाँ तक सीमित रहेगी. लेकिन इस बार भी अनुमान में गलती हुई और भारत ने पाकिस्तान को जबरदस्त टाक्कार दी. पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा. पाकिस्तान ने कश्मीरियों के राष्ट्रीय संघर्ष (राष्ट्रवादी मूवमेंट) को धार्मिक संघर्ष में बदल कर अपने नुक़सान का भरपाई किया.  तब से लेकर आज तक पाकिस्तानी स्थापना प्रोरदा जिहादी संगठन लगातार पाकिस्तानी युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण देकर कश्मीर में घुसपैठ के लिए भेजती रही हैं. इस बाहरी हस्तक्षेप कारण भारत सरकार को कश्मीर में बुनियादी नागरिक अधिकार निलंबित करने का औचित्य मिल गया जिसकी चपेट में कश्मीर के नागरिक भी आ गए.  यह एक त्रासदी था कि कश्मीर की स्वतंत्रता के नाम पर गैर कश्मीरियों ने कश्मीरियों का नरसंहार किया.

Musalmaano N Kya Diya Dunia ko ?

आज कल ब्लॉग लिखने वालो मे ज्यदा तर लेख मुसलमानो के खिलाफ लिखा जा रहा है. हर कोई अपने हिसाब से मुसलमानो को पिछड़ा साबित करने की कोशिश कर रहा है. कोई कहता है के मुसलमानो का इतिहास ही क़तल गारत से भरा है, कोई कहता है के मुसलमानो के पूर्वज जाहिल गवर थे, कोई कहता है के मुसलमानो ने इंसानियत के लिये कुछ नही किया.  मे ने सोचा क्यो न इतिहास के पन्ने पलटा जाये और देखा जाये के मुसलमानो ने इंसानियत के लिया कुछ किया है के नही. जब मे ने इतिहास के पन्ने पलटा तो देखा के मुसलमानो के दौर मे विज्ञान मे बहुत तरक्की की और उन के ज्यदातर अविष्कार आज अमरीका और यूरॉप के नाम है.

कैमरा जिसे आज यूरॉप का अविष्कार बताया जाता है, मुसलमानो की दें है. यूनानियो का खयाल था के हमारे आंखो से लेजर की तरह किरणे निकलती है और जब किसी चीज पे पड़ती है तो देखाई पड़ती है. 10 वी शताब्दी मे मशहूर नेत्र चिकित्सक इबने-हैशाम ने इस राज से पर्दा उठाया के किरणे असल जिस्मो से निकलती है और आंखो मे दाखिल होती है, इसी के बुनियाद पे दुनिया का प्रथम कैमरा बना. शब्द कैमरा अरबी शब्द क़ामारह से लिया गया है. हवाई जहाज को इजाद करने वाले राइट बन्धु है मगर अंग्रेज़ इतिहासकर मानते है के राइट बन्धु से 1 हज़ार साल पहले मशहूर शाएर, इंजिनियर इबने-फर्नास ने ये करनामा अंजाम दे चुका था. 852 मे इबने फर्नास स्पेन की जमा मस्जिद के मीनार से एक बड़ा से हुब्बा पहन कर छलांग लगाई ताके चिडियो की तरह उड सके, मगर चिडियो की तरह तो नही उड सका लेकिन उंचाई से गिरने मे समय लगा, इस तरह दुनिया का पहला पैराशूट इजाद हुआ. 875 मे इबने फर्नास ने एक बार फिर नये तैयारी से एक पहाड़ से छलांग लगाई और इस बार 10 मिनट की उड़ान भरने मे कामयाब रहा.

हम समझते है के जमीन गोल है इस की थियरी गेलेलीयो ने दिया मगर सच्चाई ए है के इस से 500 साल पहले मशहूर गणितीग्या, खगोल-विज्ञानी इबने-जजम बता चुका था के जमीन गोल है, उस ने हज़ार साल पहले जमीन के क्षेत्रफल,गहरायी आसमान के फ़ासले के जो आदाड़ बताये थे उसे आधुनिक विज्ञान ने भी माना.बारूद तो चीनियो की खोज है मगर उस मे पोटाशियम नाइट्रेट मिला कर उसे रक्षा और युद्ध मे इस्तमाल करने का सेहरा मुसलमानो को ही जाता है. मुसलमान 15 वी सदी तक रॉकेट और तारपेड की खोज कर चुके थे. आज कहा जाता है के मोटेर गाडिया अंग्रेज़ो की खोज है तो लोग फिर क्यो भूल जाते है के, वाल्व, पिस्टन,क्रेनिक सॉफ्ट साथ कुल 50 से अधिक गाडीयो के पार्ट्स बनाने वाला मुसलमान इंजिनियर आल-जजयेरी था. क्या इस के बेगैर गाड़ी बनाना मुमकिन था.आधुनिक रसायन किखोज करने वाला जाबिर बिन हयन था उस ने डिस्टिलेशन प्रोसेस की थियरी दी, सब से पहले उस ने पर्फ्यूम बनाने का फार्मूला भी दिया.

मेडिकल विज्ञान मे मुसलमानो का बहुत बड़ा योगदान रहा है. बुसीना को आधुनिक मेडिकल का जनक कहा जाता है.बुसिना की किताब अलक़नून की इंजील मेडिकल का नाम दे कर 500 साल तक एउरोप के मेडिकल कॉलेज मे पदाया जाता रहा. आल-जवाहारी ने 200 से अधिक शल्य चिकित्सा उपकरण की खोज की जो अभी तक उसी रूप मे इस्तमाल किया जा रहा है.स्टिच लगने की टेक्निक भी आल-जवाहारी ने ही सब से पहले दुनिया को बताई. विलियम हार्वे से पहले इबने-नफीस ने ब्लड सर्क्युलेशन और डेड ब्लड की थियरी सब से पहले दी. वॅक्सिन का जनक इंग्लॅन्ड के पास्चर और जेन्ज को दिया जाता है जब के हक़ीक़त है से इस से पहले मुसलमानो ने इस की खोज कर लि थी. इस्तांबओल मे इंग्लॅन्ड के राजनयिक का बच्चा को चेचक हो गया था तो उस की पत्नी 1724 मे वहा लगाई जेया रही वॅक्सिन वो इंग्लॅन्ड ले कर आई तो लोगो ने इस को जाना और इस को इंग्लॅन्ड ने अपने नाम कर लिया.

जिस समय एउरोप और इंग्लॅन्ड के लोग गन्दे रहते थे और उन के यहा नहाने और मूह धोने का रिवाज़ नही था उस समय मुसलमानो ने वेजिटल आयिल को सोडियम हाइड्रो ऑक्साइड मे मिला कर साबुन का इजाद किया और सर के बॉल धोने के लिये शेम्पो का अविष्कार किया.1759 मे इंग्लेंड मे एक मुसलमान ने वापोर बाथ सेंटर खोल कर लोगो को शॅमपू से नहाने की सहूलियत दी उस समय के लोग देख कर अस्श्चर्यचकित हो गये. दुनिया का पहला हस्पताल मिस्र मे शुरु हुअ.दुनिय मे सब से पहले डिग्री देने वाली यूनिवर्सिटी शहज़ादी फ़ातिमा ने मारक्को मे बनाई. आधुनिक बातरूम और टाय्लेट का कॉन्सेप्ट मुसलमानो ने दिया. टूत ब्रश का इस्तमाल सब से पहले मुसलमानो ने दुनिया को दिया. चेक के द्वारा बिल का भुगतान सब से पहले मुसलमानो ने बताया. दुनिया मे कॉफी और कॉफी हाउस का कॉन्सेप्ट दुनिया को मुसलमानो ने दिया. बताया जाता है के कॉफी मुस्लिम मुल्क इथोपिया के राज्य काफ्फा मे सब से पहले मिला इस लिये इसे कॉफी कहा जाने लगा. शतरंज का खेल सब से पहले मुसलमानो ने शुरु किया.

अभी हज़ारो ऐसे खोज है जो मुसलमानो के द्वारा किया गया है. यहा पर विस्तार से बताना मुमकिन नही है.अगर आप को इन सब का हवाला चाहिये तो आप इंग्लेंड  के लेखक flip.k. hitti की पुस्तक The History of Arab या युरोप से 2004 मे प्रकाशित होने वाली पुस्तक  1001 invention by muslim writer- jomney rottelin  की देख सकते है. यहा मे मुस्लिम लेखक के पुस्तको का हवाला नही देना चाहता. CNN AND GUARDIAN के वेबसाइट पे भी इस के सम्बंध मे आप को लेख मिल सकते है.

इस मे कोई शक नही है के बीते हुए सदियो मे मुसलमानो ने काफी तरक्की . थी मगर इस सच्चाई से भी मुंह नही मोड सकते के पिछले 250 साल के इतिहास मे मुसलमानो के आधुनिक युग के विकास मे कोई रोल नही रहा है क्यो के मुसलमान शिक्षा से दूर हो गये और जो क़ौम शिक्षा से दूर हो जाये गी वो कभी भी तरक़्क़ी नही कर सकता. इसी के संधर्भ मे हु ने एक लेख " हिन्दू और मुसलमान दोनो धरती के बोझ है" 

Thursday, 21 November 2013

jIHAAD ?

The Prophet Muhammad (peace be upon him) said:
"The most excellent Jihad is that for the conquest of self."
(Bukhari)

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KAMAAL "

प्रसव पीड़ा(Labor pain) में ख़जूर का रोल***

सुरह मरियम में हज़रत ईसा अलेही सलाम जिसे ईसाई जीसस क्राइस्ट कहते हैं की पैदाईश का वाक्या बयान किया गया हैं और कुरान की इस सुरह का नाम आपकी वालिदा हज़रत मरियम के नाम पर रखा गया हैं...

सुरह: मरियम में जब मेने ये पढ़ा की

फिर उसे जनने का दर्द एक खजूर की जड़ में ले आया (11)
बोली हाय किसी तरह मैं इससे पहले मर गई होती और भूली बिसरी हो जाती{23} तो उसे(12)

(12) जिब्रईल ने घाटी की ढलान से.
उसके तले से पुकारा कि ग़म न खा(13)

बेशक तेरे रब ने नीचे एक नहर बहा दी है(14){24}

और खजूर की जड़ पकड़ कर अपनी तरफ़ हिला तुझपर ताज़ी पक्की खजूरें गिरंगी(15) {25}

तो खा और पी और आँख ठन्डी रख,(16)

तब मेरे दीमाग ये बात घर कर गयी की खजूर का लेबर पैन या प्रसव पीड़ा में जरूर कोई रोल हे । इसी सोच के चलते मेने गौरो फ़िक्र किया जो नतीजा मिला वो सामने हे ।

साइंस ने आज साबित किया हे जो की 1400 साल पहले कुरआन में अल्लाह तआला ने बता दिया था ।

1) खजूर प्रसव पीड़ा को कम करता हे ...
2)खजूर में ऐसा कॉम्पोनेन्ट हे जो उस हार्मोन को सक्रिय करता हे जो की प्रसव कराने के लिए जिम्मेदार हे ।यानी प्रसव पीड़ा के दौरान खजूर खाने से वो समय जो प्रसव के दौरान होता हे वो कम हो जाएगा। सीधे शब्दों में डिलीवरी जल्दी होगी । जच्चा को ज्यादा देर तक दर्द बरदाश्त नही करना पड़ेगा । लगभग 7घंटे तक का फर्क पड़ जाएगा
3)खजूर ओक्सीटोसिन हार्मोन को एक्टिवेट करता हे जो की प्रसव कराने में सहायक हे ।

Eat Dates
Women who ate dates daily during their ninth months were less likely than non-date eaters to need medication to start labor or to help it keep progressing, a new study published in the Journal of Obstetrics and Gynaecology found. They were also more dilated upon arrival at the hospital and labored seven hours less. “Dates seem to have a compound that mimics the hormone oxytocin [which causes contractions],” says Academy of Nutrition and Dietetics spokeswoman Melinda Johnson, M.s., R.d. Enjoy six dates daily for best results.

++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

I came across an amazing scientific
miracle in the Quran, it is in Surah Al Maryam....

When a Mother is giving
birth it can be the most painful period in her life, its not easy....Now when
Maryam was pregnent (at time of Eesaa a.s.), was going through such pain, Allah in the Quran orders her to go near a stream of water, You have to listen
carefully to the science of this verses, Allah tells her to go near a stream of
water where next to it is a Palm tree, Allah instructs her to shake the palm tree and keep pulling down from trunks of the palm tree, so the dates can fall down for her.

Some people may ask why is Allah telling us about the palm tree, the stream of water and the dates? Why did Allah not just simply tell us that she gave birth to Eesaa (a.s.) and that's it, why all
these details??

Now here is the miracle, Firstly Allah tells her to shake the palm tree and keep pulling,some hospitals until very recently when a Mother is about to give birth, there is something they
will tell her to hold on to and they tell her to keep pulling it back so it eases
labour pain and muscle tension. Then Allah tells her to cool herself with
water, there are modern hospitals today that tell pregnant women to sit
in cool water as it will help them give birth,Then Allah tells her in the Quran that when she has relaxed in the water it will make her birth pain
easier but he also tells her to straight away to eat the dates that fall....

Now one may ask why did Allah instruct her to eat the dates??

This is because dates contain within them easily absorb-able sugars which help the heat and the movement and these
sugars are of the fructose type which help raise the blood pressure....

So the methods Hospitals are using today to ease birth pains, Allah has hinted in the Quran 1400 years back....

Subhan Allaah

BABAR BBM

#08
— with Nazia Ansari and 16 others.

bharat M Vishfot Kaun Kart h ?

भारत में बम विस्फोट कौन करता है ?

1- मालेगाँव का बम विस्फोट-ब्राह्मण जात ''लेफ़्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित'', साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर,
2- अजमेर दरगाह का बम विस्फोट-ब्राह्मण जात स्वामी असीमानंद , इंद्रेश कुमार (आरएसएस के वरिष्ठ नेता), देवेंद्र गुप्ता, साध्वी प्रज्ञा सिंह, सुनील जोशी, संदीप डांगे, रामचंद्र कलसांगरा उर्फ रामजी, शिवम धाक़ड, लोकेश शर्मा, समंदर , योगी आदित्यनाथ.
3- मक्का मस्जिद का बम विस्फोट-स्वामी असीमानंद एन्ड कंपनी
4- समझौता एक्सप्रेस का बम विस्फोट-स्वामी असीमानंद एन्ड कंपनी
5- नांदेड बम विस्फोट-संघ कार्यकर्ता राजकोंडवार तथा नकली दाड़ी और शेरवानी , कुरता , पायजामा भी बरामद
6- गोरखपुर का सिलसिलेवार बम विस्फोट- अज्ञात - आफ़ताब आलम अन्सारी है- गिरफ्तार किया व ब ईज्जत रिहा
7- मुंबई ट्रेन बम विस्फोट - अज्ञात क्योंकि मुस्लिमों को फंसाया नहीं जा सका
7- घाटकोपर में बेस्ट की बस में हुए बम विस्फोट- अज्ञात क्योंकि मुस्लिमों को फंसाया नहीं जा सका .
8- वाराणसी बम विस्फोट-अज्ञात क्योंकि मुस्लिमों को फंसाया नहीं जा सका .
9- कानपुर बम विस्फोट-बजरंग दल कार्यकर्ता भूपेन्द्र सिंह छावड़ा और राजीव मिश्रा
10 पाकिस्तानी कसाब -जिम्मेदार भारत सरकार क्योंकि उसे 15 दिन पहले से जानकारी थी -कमिश्नर मुश्रीफ का बयान
११)पटना ब्लास्ट (बजरग दल के कार्यकर्ता
१२) कोसीकला ब्लास्ट (बजरंग दल के कार्यकर्ता )

#01ADI

pray for mother

MUST READ....IF U LOVE UR MOTHER THEN U CAN FEEL THE FEELING OF THESE WORDS.
==================

Sab ka gum mai kagaz pe likhta hu,
Aaj socha ke maa teri dastan bhi byan kar du.

Waise to meri har ek saans teri rahmat ki mohtaj hai...
magar aaj mai sabke samne apni zindagi tere naam kardu...

Maine apni aankho ke samne tujhe bilakhta jab jab dekha hai...
Tab tab maa maine apne dil ko dhadkne se roka hai...

mujhe to yaad nhi manzar wo bachpan ka...
magar logo se mai teri mamta ki dastan sunta aaya hu...

Tujhe taklifo ke badle hazaro khushia du...
maa aise lakho sapne mai aaj tak bunte aaya hu...

khushi se tu fule nhi smati thi...
kahte hai bar bar mera matha chume jati thi...

suna hai tune us waqt mere liye khana pina tak chhod diya tha...
mujhe apne sine se laga kar tune jahan se muh mod liya tha...

toote huye chhat se jab raato ko pani tapkata tha...(Fact)
tab suna hai maa teri mamta ka amrit mujh pe barsta tha...

tu pani wali jagah pe khud let jaya karti thi...
kahi mujhe na kuchh hojaye is baat se tu darti thi...

hamesha tune sabse jyada mujhe chaha hai...
mai mila hu manato se hamesha hi mujhe ye kaha hai...

mere dukh ke waqt me bhi ek tuhi thi jisne mujhe smjha tha...
mai kya chahta hu bina kahe hi tune jana tha...

sara sara din rab ke aage meri slamti ke liye duaye mangti rahti thi...
mujhe uthale magar mere bete ko thik kar tu baar baar rab se ye kahti thi...

tere itne ahsano ke badle mai tujhe aaj tak kya de paya hu...
teri zindagi ka rati bhar gum bhi na mai kam kar paya hu...

Tujhe taklifo ke badle hazaro khushia du...
maa aise lakho sapne mai aaj tak bunte aaya hu...

Umeed hai ke mai aage kuchh aisa kar ke dikhaunga,
Mai apni maa ki sari khushio ko pura kar jaunga.



#01ADI

pray for mother

MUST READ....IF U LOVE UR MOTHER THEN U CAN FEEL THE FEELING OF THESE WORDS.
==================

Sab ka gum mai kagaz pe likhta hu,
Aaj socha ke maa teri dastan bhi byan kar du.

Waise to meri har ek saans teri rahmat ki mohtaj hai...
magar aaj mai sabke samne apni zindagi tere naam kardu...

Maine apni aankho ke samne tujhe bilakhta jab jab dekha hai...
Tab tab maa maine apne dil ko dhadkne se roka hai...

mujhe to yaad nhi manzar wo bachpan ka...
magar logo se mai teri mamta ki dastan sunta aaya hu...

Tujhe taklifo ke badle hazaro khushia du...
maa aise lakho sapne mai aaj tak bunte aaya hu...

khushi se tu fule nhi smati thi...
kahte hai bar bar mera matha chume jati thi...

suna hai tune us waqt mere liye khana pina tak chhod diya tha...
mujhe apne sine se laga kar tune jahan se muh mod liya tha...

toote huye chhat se jab raato ko pani tapkata tha...(Fact)
tab suna hai maa teri mamta ka amrit mujh pe barsta tha...

tu pani wali jagah pe khud let jaya karti thi...
kahi mujhe na kuchh hojaye is baat se tu darti thi...

hamesha tune sabse jyada mujhe chaha hai...
mai mila hu manato se hamesha hi mujhe ye kaha hai...

mere dukh ke waqt me bhi ek tuhi thi jisne mujhe smjha tha...
mai kya chahta hu bina kahe hi tune jana tha...

sara sara din rab ke aage meri slamti ke liye duaye mangti rahti thi...
mujhe uthale magar mere bete ko thik kar tu baar baar rab se ye kahti thi...

tere itne ahsano ke badle mai tujhe aaj tak kya de paya hu...
teri zindagi ka rati bhar gum bhi na mai kam kar paya hu...

Tujhe taklifo ke badle hazaro khushia du...
maa aise lakho sapne mai aaj tak bunte aaya hu...

Umeed hai ke mai aage kuchh aisa kar ke dikhaunga,
Mai apni maa ki sari khushio ko pura kar jaunga.



#01ADI

Atal Bihari '

अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में के. आर. नारायणन की इस
प्रतिक्रिया को बीजेपी वाले बड़ी बेशर्मी से हजम कर गए और अब
भारत रत्न मांग रहे हैं।
'गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों को शासन और प्रशासन से शह
मिली थी। मैंने इस संबंध में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को कई
चिट्ठी लिखी। खुद मुलाकात कर इस मसले पर बात की, लेकिन अटल
बिहारी वाजपेयी ने कुछ नहीं किया।
मैंने वाजपेयी से गुजरात में सेना भेजने की गुज़ारिश
की ताकि दंगा रोका जा सके। सेना भेजने का संवैधानिक अधिकार केंद्र
सरकार के ही पास होता है, अगर राज्य इसकी मांग करे।
सेना भेजी भी गई, लेकिन उसे गोली मारने का अधिकार नहीं दिया गया।
अगर सेना के पास दंगाइयों को गोली मारने की शक्ति होती तो गुजरात
में हुए हादसे को टाला जा सकता था। लेकिन राज्य और केंद्र सरकार
ने ऐसा नहीं किया। गोली मारने का आदेश जारी होने पर गुजरात में बड़े
पैमाने पर हुई तबाही रुक सकती थी। मुझे महसूस होता है कि गुजरात
दंगे केंद्र और राज्य सरकार के षडयंत्र का नतीजा हैं।'
के आर नारायणन, पूर्व राष्ट्रपति

EK DESHBHAKT "

आपको ये मालूम है कि आज़ाद हिन्द फ़ौज के
लिए एक मुस्लिम व्यापारी (अब्दुल हबीब युसूफ
जी) ने अपनी सारी पूँजी (उस समय का १ करोड़,
आज का हज़ार करोड़ रुपिया) नेताजी सुभाष
चन्द्र बोस जी को दे दिया था। आजतक
का किसी भी भारतीय व्यति का सबसे अधिक
व्यक्तिगत पूँजी का दान है ये।
आपको ये भी पता होना चाहिए कि "जय हिन्द'
का नारा भी एक मुस्लिम आजाद हिन्द
फ़ौजी (जर्मनी से डिग्री प्राप्त भारतीय
इंजिनियर) आबिद हसन की देन है।
आज भी देखिये तो बिना हल्ला गुल्ला मचाय अज़ीम
प्रेमजी ने बारह हज़ार तीन सौ करोड़
(12300 करोड़) रूपए समाज के लिए दान कर
दिया है।
विडम्बना ये है कि मोदी और नाथूराम के
अनुयायी भारत की एकता और अखंडता के विरुद्ध
काम कर रहे हैं।

Kuchh Kadwe SACH '

सीता की विवाह केवल 6 वर्ष की आयु में हुई थी..‘सीता जी की आयु 6 वर्ष थी‘, जो लोग बाल्मीकि रामायणको प्रमाण मानते हैं वे इस तथ्य को झुठला नहीं सकते।दुहिता जनकस्याहं मैथिलस्य
महात्मनः।। 3 ।।सीता नाम्नास्मि भद्रं ते रामस्य महिषी प्रिया ।।‘ब्रह्मन ! आपका भला हो। मैं मिथिला नरेश जनक की पुत्री औरअवध नरेश श्री रामचन्द्र जी की प्यारी रानी हूँ| मेरा नाम सीता है‘।। 3 ।।
उषित्वा द्वादश समा इक्ष्वाकूणां निवेशने ।। 4 ।। भुन्जाना मानुषान् भोगान् सर्व काम समृद्धिनी ।।‘विवाह के बाद बारह वर्षों तक इक्ष्वाकुवंशी महाराज दशरथ के महल में रहकर मैंने अपने पति के साथ सभी मानवोचित भोग भोगेहैं। मैं वहां सदा मनोवांछित सुख-सुविधाओं से सम्पन्न रही हूं‘।।4 ।।तत्र त्रयोदशे वर्षे राजातन्त्रयत प्रभुः।। 5 ।। अभिषेचयितुं रामं समेतो राजमन्त्रिभिः ।।‘तेरहवें वर्ष के प्रारम्भ में सामर्थ्यशाली महाराज दशरथ ने राज मन्त्रियों से मिलकर सलाह की और श्रीरामचन्द्रजी का युवराज पद पर अभिषेक करने का निश्चय किया‘ ।। 5 ।।मम भर्ता महातेजा वयसा पञ्चविंशकः ।। 10 ।।अष्टादश हि वर्षाणि मम जन्मनि गण्यते ।।‘उस समय मेरे महातेजस्वी पति की अवस्था पच्चीस साल सेऊपर की थी और मेरे जन्मकाल से ले कर वन गमन काल तक मेरी अवस्था वर्ष गणना के अनुसारअठारह साल की हो गयी थी ।। 10 ।।

श्रीमद्ब बाल्मीकी य रामायणे, अरण्यकाण्डे,सप्तचत्वारिंशः सर्गः,पृष्ठ 598, सं. 2051 तेरहवां संस्करण,मूल्य पैंतालीस रूपयेअनुवादक-साहित्याचार्य पाण्डेय पं. रामनारायण दत्तशास्त्री ‘राम‘प्रकाशक - गीता प्रेस , गोरखपुर,

रामायण के मूल श्लोक और उनका अनुवादआपके सामने रख दिये गये हैं। आप खुद फ़ैसला कर सकते हैं। कवि ने क्यों सीता जी को विवाह के समय 6 वर्षका दिखाना ज़रूरी समझा, इस विषय पर मैंअपना नज़रिया बाद में रखूंगा।दुख होता है यह देखकर कि जो लोग रामायण के ब्लॉग चला रहे हैं उन्हें भी सही तथ्यका ज्ञान नहीं है या फिर दूसरे लोगों को भ्रम में डाले रखने के लिए खुदको अनभिज्ञ दिखाते हैं।रामचन्द्र जी का असली चरित्र रमणीय और आदर्शही होना चाहिये, ऐसा मेरा मानना है।बौद्धिक जागरण के इस काल में तर्क को परंपरा का हवाला देकर नज़रअंदाज़नहीं किया जा सकता। रामचन्द्र जी के चरित्र को सामने लाने केलिए देश की रामकथाओं के साथ साथ मलेशिया आदि विदेशों मेंप्रचलित रामकथाओं पर भी नज़र
डालना ज़रूरी है।यदि ऐसा किया जाए तो सच भी सामने आएगा,रामकथा का व्यापक प्रभाव भी नज़र आएगा औरहो सकता हैकि श्री रामचन्द्र जी का वास्तविकजन्म स्थानवर्तमानअयोध्या के
अलावा कोई और जगह निकले,तब राम मंदिर-बाबरी मस्जिद
विवाद भी स्वतः ही हल हो जाएगा। सच से मानवता का कल्याण होगा। सच कड़वा होता है तब भी इसे ग्रहण करना चाहिये क्योंकि सच हितकारी होता है,

mUSALMAAN "

हम मुसलमान हे हम किसी से नही डरते !
ना हम हुकूमत से डरते..
ना हम गोलियोँ की बोछार से डरते !
ना हम बम बारूद से डरते!
ना हम इन इस्लाम के दुशमनो से डरते !

हम सिर्फ एक रब्बुल आलमीन से डरते हे जो सारी कायनात का अकेला मालिक हे !
जिसने सारी कायनात को अपने हुकुम से
बनाया हे और उसी के हुकुम से फना हो जायगी !!! अगर यही सोच हर मुसलमान की हो जाये तो मुज़फ्फर नगर, अयोध्या, गुजरात क्या, इस्राईल, क्या पूरी दुनिया पर हुकूमत पा जायें !!! अपने ईमान पर जम जाओ ! अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड़कर, अल्लाह से मदद लो, इन कुफ्फारे कायनात की क्या औकात, एक आँख तो उठा कर देख ले ! नेक अमल पर जमकर, अल्लाह की ग़ैबी मदद का भरपूर फायदा उठाओ !.....इन्शा अल्लाह

Al Qur aan "

^^ अल- क़ुरान ^^

"जिन लोगों ने इनकार किया वे कहते है, "हम इस क़ुरआन को कदापि न मानेंगे और न उसको जो इसके आगे है।" और यदि तुम देख पाते जब (क़यामत के दिन) ज़ालिम अपने रब के सामने खड़े कर दिए जाएँगे। वे आपस में एक-दूसरे पर इल्ज़ाम डाल रहे होंगे। जो लोग कमज़ोर समझे गए वे उन लोगों से जो बड़े बनते थे कहेंगे, "यदि तुम न होते तो हम अवश्य ही ईमानवाले होते। (31)

वे लोग जो बड़े बनते थे उन लोगों से जो कमज़ोर समझे गए थे, कहेंगे, "क्या हमने तुम्हे उस मार्गदर्शन से रोका था, वह तुम्हारे पास आया था? नहीं, बल्कि तुम स्वयं ही अपराधी हो।" (32)

वे लोग कमज़ोर समझे गए थे बड़े बननेवालों से कहेंगे, "नहीं, बल्कि रात-दिन की मक्कारी थी जब तुम हमसे कहते थे कि हम अल्लाह के साथ कुफ़्र करें और दूसरों को उसका समकक्ष ठहराएँ।" जब वे यातना देखेंगे तो मन ही मन पछताएँगे और हम उन लोगों की गरदनों में जिन्होंने कुफ़्र की नीति अपनाई, तौक़ डाल देंगे। वे वही तो बदले में पाएँगे, जो वे करते रहे थे? (33)

हमने जिस बस्ती में भी कोई सचेतकर्ता (नबी/रसूल) भेजा तो वहाँ के सम्पन्न लोगों ने यही कहा कि "जो कुछ देकर तुम्हें भेजा गया है, हम तो उसको नहीं मानते।" (34)

उन्होंने यह भी कहा कि "हम तो धन और संतान में तुमसे बढ़कर है और हम यातनाग्रस्त होनेवाले नहीं।" (35)

कहो, "निस्संदेह मेरा रब जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और जिसे चाहता है नपी-तुली देता है। किन्तु अधिकांश लोग जानते नहीं।" (36)

वह चीज़ न तुम्हारे धन है और न तुम्हारी सन्तान, जो तुम्हें हमसे (अल्लाह से) निकट कर दे। अलबता, जो कोई ईमान लाया और उसने अच्छा कर्म किया, तो ऐसे ही लोग है जिनके लिए उसका कई गुना बदला है, जो उन्होंने किया। और वे ऊपरी मंजिल के कक्षों में निश्चिन्तता-पूर्वक रहेंगे (37)

Al-Quran 34-31:39

Jasooos :

मुल्क में अब जासूस बेनकाब हो रहा है ,
झूठ का अब धीरे -धीरे पर्दाफाश हो रहा है ,
कोई सलीका नहीं है इनको बात करने का ,
पसीना पोंछकर रौब झाड़ने का काम हो रहा है ,
कोई फेंकू कोई पप्पू ये इनकी मातृभाषा है ,
दुनिया में मेरा मुल्क अब बदनाम हो रहा है ,
भूख से मेरे मुल्क में लाखों लोग सोते है ,
भीड़ जुटाने में करोड़ों का इन्तजाम हो रहा है ,
चुनावों में कोई शहजादा तो कोई साहबजादा है ,
सिर्फ हमें बेवकूफ बनाने का इन्तजाम हो रहा है ,
मीडिया के लोग भी क्या खूब वाह वाही कर रहे है ,
वोटरों को भरमाने का बखूबी ये प्लान हो रहा है ,
मुल्क की हुयी है तरक्की सिर्फ गुजरात की नहीं ,
सिर्फ हल्ला करके वो देश को बदनाम कर रहा है ,
चोर सियासी दलों के दिल में है ये जानता है "वसी'',
एक दुसरे को चोर कहने पे खूब कोहराम हो रहा है !

aNDHvishwas

अंधविश्वास की कैद पेज से कॉपी किया गया

धर्म के ठेकेदारों का दोहरा चरित्र देखिये

1. कुत्ता आता है इनके भगवान पर मूत कर
चला जाता है । ये कुत्ते की पूँछ
भी नहीं उखाड़ पाते और बचाव में कहते हैं -
क्या संतान अपने पिता के ऊपर मूत्र त्याग
नहीं करती है । अगर एक इंसान इनके
भगवान के पास से भी गुजर जाये
तो वो भगवान अपवित्र हो जाता है । ये
उसके ऊपर लाठी डंडे लेकर चढ़ जाते हैं ।

2. एक चूहा अथवा बंदर आता है इनके
भगवान के भोग अर्थात भोजन को खाकर
झूठा करके चले जाते हैं । ये उनका एक बाल
तक भी नहीं उखाड़ पाते और कहते हैं कि ये
तो भगवान का रूप हैं । अगर एक
आदमी इसी काम को करता है तो ये
उसको काटने को दौड़ पड़ते हैं और
उसको नीच, दुष्ट, अधम और ना जाने
कैसी कैसी उपाधियों से नवाज डालते हैं ।

3. ये धर्म के ठेकेदार एक इंसान के पैर स्पर्श
करने के लिए अपना धन और समय
दोनों गंवाते हैं और अपने
आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं
जबकि एक इंसान के देखने छूने मात्र से
ही इनका अमंगल हो जाता है । ये नर्क के
भागी हो जाते हैं ।

4. ये धर्म के ठेकेदार पशुओं के साथ बिस्तर
साझा करते हैं लेकिन इंसानों के साथ
बैठना भी साझा नहीं कर सकते ।

5. ये जानवरों को माँ बाप कह सकते हैं
लेकिन इंसान को इंसान नहीं कह सकते ।

6. ये पत्थरों पर घी और दूध
की नदियाँ बहा सकते हैं लेकिन भूखे नंगे
इंसानों को दुत्कार कर भगा देते हैं ।

7. ये दूसरों से कहते हैं क्रोध मनुष्य का सबसे
बड़ा दुश्मन है । क्रोध मत करो लेकिन ये
खुद क्रोध की जिन्दी तस्वीर होते हैं ।
क्रोध तो इनकी नाक पर रखा होता है ।
किसी ने कुछ विपरीत विचार रखे
नहीं कि साँप की तरह जीभ लपलपाने लगते
हैं ।

8. ये दूसरो को उपदेश देते हैं मोह
माया का त्याग करो लेकिन खुद इस चक्कर
में लगे रहते हैं किस तरह से मूर्ख बनाकर
बेवकूफों से धन ऐंठा जाये ।

9. ये कहते हैं सादा जीवन उच्च विचार
लेकिन खुद आलिशान आश्रमों और बंगलो में
रहते हैं, वातानुकूलित गाडियों में चलते हैं ।
अब आप सोचो इनसे बड़ा धूर्त और
पाखंडी कोई और हो सकता है ?

eK Real StOrY ?

एक भावुक कहानी

एक आइसक्रीम वाला रोज एक मोहल्ले में आइसक्रीम बेचने जाया करता था , उस कालोनी में सारे पैसे वाले लोग रहा करते थे . लेकिन वह एक परिवार ऐसा भी था जो आर्थिक तंगी से गुजर रहा था. उनका एक चार साल का बेटा था जो हर दिन खिड़की से उस आइसक्रीम वाले को ललचाई नजरो से देखा करता था. आइसक्रीम वाला भी उसे पहचानने लगा था . लेकिन कभी वो लड़का घर से बाहर नहीं आया आइसक्रीम खाने .
एक दिन उस आइसक्रीम वाले का मन नहीं माना तो वो खिड़की के पास जाकर उस बच्चे से बोला ,
" बेटा क्या आपको आइसक्रीम अच्छी नहीं लगती. आप कभी मेरी आइसक्रीम नहीं खरीदते ? "
उस चार साल के बच्चे ने बड़ी मासूमियत के साथ कहा ,
" मुझे आइसक्रीम बहुत पसंद हे . पर माँ के पास पैसे नहीं हे "
उस आइसक्रीम वाले को यह सूनकर उस बच्चे पर बड़ा प्यार आया . उसने कहा ,
" बेटा तुम मुझसे रोज आइसक्रीम ले लिया करो. मुझसे तुमसे पैसे नहीं चाहिए "
वो बच्चा बहुत समझदार निकला . बहुत सहज भाव से बोला ,
" नहीं ले सकता , माँ ने कहा हे किसी से मुफ्त में कुछ लेना गन्दी बात होती हे , इसलिए में कुछ दिए बिना आइसक्रीम नहीं ले सकता "
वो आइसक्रीम वाला बच्चे के मुह से इतनी गहरी बात सूनकर आश्चर्यचकित रह गया . फिर उसने कहा ,
" तुम मुझे आइसक्रीम के बदले में रोज एक पप्पी दे दिया करो . इस तरह मुझे आइसक्रीम की कीमत मिल जाया करेगी "
बच्चा ये सुकर बहुत खुश हुआ वो दौड़कर घर से बाहर आया . आइसक्रीम वाले ने उसे एक आइसक्रीम दी और बदले में उस बच्चे ने उस आइसक्रीम वाले के गालो पर एक पप्पी दी और खुश होकर घर के अन्दर भाग गया .
अब तो रोज का यही सिलसिला हो गया. वो आइसक्रीम वाला रोज आता और एक पप्पी के बदले उस बच्चे को आइसक्रीम दे जाता .
करीब एक महीने तक यही चलता रहा . लेकिन उसके बाद उस बच्चे ने अचानक से आना बंद कर दिया . अब वो खिड़की पर भी नजर नहीं आता था .
जब कुछ दिन हो गए तो आइसक्रीम वाले का मन नहीं मन और वो उस घर पर पहुच गया . दरवाजा उस बालक की माँ ने खोला . आइसक्रीम वाले ने उत्सुकता से उस बच्चे के बारे में पूछा तो उसकी माँ ने कहा ,
" देखिये भाई साहब हम गरीब लोग हे . हमारे पास इतना पैसा नहीं के अपने बच्चे को रोज आइसक्रीम खिला सके . आप उसे रोज मुफ्त में आइसक्रीम खिलाते रहे. जिस दिन मुझे ये बात पता चली तो मुझे बहुत शर्मिंदगी हुई .आप एक अच्छे इंसान हे लेकिन में अपने बेटे को मुफ्त में आइसक्रीम खाने नहीं दे सकती . "
बच्चे की माँ की बाते सूनकर उस आइसक्रीम वाले ने जो उत्तर दिया वो आप सब के लिए सोचने का कारण बन सकता हे ,
" बहनजी , कौन कहता हे की में उसे मुफ्त में आइसक्रीम खिलाता था . में इतना दयालु या उपकार करने वाला नहीं हु में व्यापार करता हु . और आपके बेटे से जो मुझे मिला वो उस आइसक्रीम की कीमत से कही अधिक मूल्यवान था . और कम मूल्य की वास्तु का अधिक मूल्य वसूल करना ही व्यापार हे ,
एक बच्चे का निश्छल प्रेम पा लेना सोने चांदी के सिक्के पा लेने से कही अधिक मूल्यवान हे . आपने अपने बेटे को बहुत अच्छे संस्कार दिए हे लेकिन में आपसे पूछता हु क्या प्रेम का कोई मूल्य नहीं होता ?"
उस आइसक्रीम वाले के अर्थपूर्ण शब्द सूनकर बालक की माँ की आँखे भीग गयी उन्होंने बालक को पुकारा तो वो दौड़कर आ गया . माँ का इशारा पाते ही बालक दौड़कर आइसक्रीम वाले से लिपट गया . आइसक्रीम वाले ने बालक को गोद में उठा लिया और बाहर जाते हुए कहने लगा ,
" तुम्हारे लिए आज चोकलेट आइसक्रीम लाया हु . तुझे बहुत पसंद हे न ?"
बच्चा उत्साह से बोला ,
" हां बहुत "
बालक की माँ ख़ुशी से रो पड़ती है

Ajeeb Dastan Hmare SATH KYO >?

बेटियो कि इज़ज़त लुटी जाती हैं उनके घर जला दिए जाते हैं उन्हें अपना गांव शहर छोड़ कर दूसरी जगह भीख मांगने को सड़क पर छोड़ दिया जाता हैं

फिर उसके बाद बड़ी तादाद में मुस्लिमो को गिरफ्तार किया जाता हैं दंगो का बदला लेने के लिए आतंकवाद फ़ैलाने कि साजिश के जुर्म में, आतंकवाद के जुर्म में, पकडे गए मुस्लिम अपना जुर्म कबूल करते हुए बड़े बड़े खुलासे करते हैं

गज़ब कि कहानी हैं

hINDUSTAANI KI ASLI KEEMAT /

ए हिन्दुस्तानियो ...

तुम्हारी जान कि औकात दो कोड़ी कि नहीं हैं विदेशी दवा कंपनीया अपनी नै इज़ाद कि हुई दवाओ कि जांच तुम्हारे ऊपर करती हैं वो भी यहाँ के हॉस्पिटल के साथ मिलकर समाज सेवा का ढोंग करते हुए मुफ्त इलाज़ के नाम पर ...अब तक इसमें गत 8 सालो में आधिकारिक रूप से लगभग चार हज़ार लोगो कि मौत हो गई हैं और बारह हज़ार लोग इसके दुष्प्रभाव के शिकार होकर तड़प तड़प कर जीने को मज़बूर हो गए हैं इतना सबकुछ होता हैं वो भी मरीज़ और उसके घर वालो को बगैर बताये

इन विदेशी दवा कंपनीयो ने और हमारे यहाँ भगवान् समझे जाने डॉक्टरो और उनके अस्प्तालों कि मिली भगत ने आम हिन्दुस्तानियो को प्रयोगशाला के चूहे मेंढक बनाकर रख दिया हैं जो वो हमारे ऊपर उनकी दवाए टेस्ट करके देखते हैं क्या इन्हे मरीज़ का, उनके घर वालो के जज्बातो का कोई भी ख्याल नहीं है कुछ ऐसा ही इंदौर में निरंजन लाल के साथ महाराजा यशवंत राव हॉस्पिटल में हुआ ...

अगर कोई लाइलाज़ मर्ज़ हैं और आपके पास दवाओ में और कोई चारा न बचे तो कम से कम मरीज़ और उसके घर वालो को बताकर तो कर सकते हो मगर साधारण स्थिति में दवाओ का परिक्षण मरीज़ कि जान लेने का अपराध हैं और चिकित्सा जैसे पेशे पर विस्वास का क़त्ल ...

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Admin - 09